अगर इस पंक्ति से सहमत है तो आगे पड़े अन्यथा अपने अमुल्य समय को इस लेखन पर व्यर्थ ना करे। हर धर्म का व्यक्ति जानता है की सबसे बडा धर्म ही कर्म है, और कर्म का सही अर्थ मेरे हिसाब से इंसानियत को बनाए रखते हए अपने देश और देशवासियो के प्रती निस्वार्थ रूप से प्रेम, समर्पण और उचित प्रकार से अपने कर्तव्यों का पालन करना है।परन्तु दुख की बात है की अधिकांश लोग सब जानते हए भी शायद कई बातो से अंजान है। हम आपस में ही हिन्दू-मुस्लिम करते रहते है जबकी बचपन से ही हमें सिखाया जाता है की- हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई आपस मे सब भाई भाई। अगर आप अपने धर्म के प्रति सच्ची निष्ठा रखते है और आपको अपने धर्म के प्रति ज्ञान है। तो कोई धर्म किसी दूसरे धर्म का अपमान करना नही सिखाता।
एक दूसरे का विद्रोह करके धर्म पर राजनिती करके आप अपने धर्म के साथ साथ अपने देश का स्तर नीचे गिरा रहे है। अगर राजनीती ही करनी है तो आज आपके पास अवसर है कर्म पर राजनीती कर अपने देश के प्रती जागरुकता दिखते हए स्वदेशी वस्तुए अपनाये और दूसरो को भी स्वदेशी अपनाने को प्रेरित करें।
यदि हमारे भारतीय आपस में सोचे तो उन्हे मालूम होगा कि कभी पढ़ा लिखा आदमी खासतौर से हम भारतीय- हम भारतियों का स्वयं का परिवार है अतः वे स्वयं ही डरे-सहमे है कि न जाने कब कौन सी अनहोनी हुई और उन पर सीधा निशाना सधा। ऐसे में क्या हमारा फ़र्ज़ नही कि अपने समाज की स्थिति को समझे और हालात को समझते हुए अपने आस-पास का महौल संतुलित रखें। जहां अपने ही भारतियों के बीच अफवाहों का सहारा लेकर एक-दूसरे को हांनि पहुचाने में लगे हैं। जिससे देश की अर्थव्यव्स्था मजबूत होने के साथ साथ हमारे देशवाशियो का भी भला होगा। समय विराम न्यूज़